कबीर तिवारी हत्याकांड: कोर्ट सख्त, 3 आरोपियों के खिलाफ वारंट, 4 को समन
बस्ती: छात्रनेता हत्याकांड में अदालत की सख्ती, 7 आरोपियों को तलब: 7 साल पुराने कबीर तिवारी हत्याकांड में नया मोड़: 3 आरोपियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी
अजीत मिश्रा (खोजी)
कबीर तिवारी हत्याकांड: अदालत सख्त, 3 आरोपियों के खिलाफ जमानती वारंट, 4 को समन
- कबीर तिवारी मर्डर केस: पेशी से गायब आरोपियों पर कोर्ट नाराज, जारी हुआ वारंट
- न्याय की राह पर कबीर तिवारी हत्याकांड: कोर्ट ने लिया सख्त संज्ञान, वारंट और समन जारी
- छात्रनेता हत्याकांड में कोर्ट का बड़ा आदेश, पेशी पर नहीं पहुंचे आरोपियों पर गिरेगी गाज
बस्ती। सात साल पुराने चर्चित छात्रनेता कबीर तिवारी हत्याकांड में जिला अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रमोद कुमार गिरि की अदालत ने पेशी पर अनुपस्थित रहने वाले तीन आरोपियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए हैं, जबकि चार अन्य को समन जारी कर अगली सुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
अदालत ने इससे पहले 7 मई को इस मामले से बाहर किए गए सात आरोपियों को बतौर मुलजिम तलब किया था। इन सभी को 20 मई (मंगलवार) को अदालत में पेश होना था, लेकिन निर्धारित समय पर कोई भी आरोपी अदालत नहीं पहुंचा। इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की और कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया।
किसके खिलाफ क्या कार्रवाई?
- जमानती वारंट: मोहम्मद साद उर्फ सद्दू, साहिल सिंह और इमरान उर्फ शिबू के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए गए हैं।
- समन जारी: अमन प्रताप सिंह, अक्षय प्रताप सिंह, समीर खान और अवनीश सिंह को समन भेजकर अगली तारीख पर पेश होने का आदेश दिया गया है।
दिनदहाड़े हुई थी हत्या
बता दें कि कप्तानगंज थाना क्षेत्र के एंठीडीह गांव निवासी और एपीएन पीजी कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कबीर तिवारी की 9 अक्टूबर 2019 को मालवीय रोड पर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था। घटना के बाद वादी शिवप्रसाद तिवारी की तहरीर पर कुल 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।
रसूख और जांच को लेकर उठा था विवाद
वादी पक्ष और शासकीय अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि आरोपी प्रभावशाली हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पहले सीबीआई जांच की मांग उठी थी, जिसके बाद शासन ने जांच CBCID को सौंप दी थी। वादी पक्ष का आरोप है कि सीबीसीआईडी ने जांच में देरी की और बाद में सात आरोपियों के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी।
अब अदालत द्वारा इन आरोपियों को दोबारा तलब किए जाने के बाद यह मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है। स्थानीय लोगों की निगाहें अब मामले की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।








